सुन्दर कांड में दो चरित्र है —- पूर्वार्ध में हनुमत चरित और उत्तरार्द्ध में राम चरित अतः हरिहरात्मक होने से यह कांड नितान्त सुंदर है।
हनुमान जी की वानरों से विनय, पर्वत पर से उडान, मैनाक से हनुमान जी का व्यवहार, सुरसा परीक्षा प्रसंग, छाया ग्रह विनाश, फल संपन्न उपवन देखकर भी फलादि का स्पर्श न करना, नगर प़वेश में सावधानी, लंकिनी की निगरानी, तुलसी वृंद देखकर स्वभाव ज्ञान निपुणता, हनुमान विभीषण मिलन, अशोक वाटिका में रावण संभाषण के समय हनुमान जी का इंद्रिय संयम इत्यादि प़त्येक चरित आदरणीय है।

क्वचित इससे संबंधित अनुष्ठान भी किए जाते हैं। सुंदर कांड का पाठ नष्ट द्रव्य प़ाप्त के लिए, विजय प्राप्त करने के लिए, मंगल लाभ के लिए, भक्ति भाव वृद्धि के लिए, भगवत् दर्शन के लिए, हनुमान जी की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए और समस्त सुंदर मनोरम फल प्राप्त करने के लिए किया जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो उपरोक्त सभी फलों की प्राप्ति सुंदर कांड के विधिवत पारायण से होती है।
सुंदर कांड का पाठ मंदिर में , नदी तट पर, पर्वत पर, अपने घर पर कहीं भी किया जा सकता है। मन में शुचिता और विश्वास हो, स्थान साफ़ सुथरा हो, हनुमान जी के लिए एक सुंदर आसन हो, उनकी सुंदर मूर्ति या तस्वीर हो , धूप दीप चन्दन, नैवेद्य आदि क्षमता नुसार जुटा कर संकल्प एवं रामपरिवार आवाहन कर पाठ आरंभ करना चाहिए। सुंदर कांड के प़त्येक चौपाई दोहों, सोरठो एवं छंदों के भावों का मनन करते हुए हनुमान जी की मूर्ति को हृदय मंदिर में बैठाकर मधुर स्वर से पाठ करना चाहिए। सुंदर कांड के प़त्येक शब्द में विशिष्ट भाव भरा हुआ है । देखिए लंका प़वेश के बाद जहां जहां भी हनुमान जी के चरण पडते है वह स्थान मंदिर हो जाता है
मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा, देखै जहं तहं अगनित जोधा। गयउ दशानन मंदिर माहीं —— राक्षसों के घरों में जैसे ही हनुमान जी सीता जी के शोध के लिए प़वेश करते हैं वह घर मंदिर तुल्य हो जाता है यहां तक कि रावण के घर को भी कवि कुल शिरोमणि ने मंदिर लिख दिया परंतु विभीषण के घर के संबंध में लिखते हैं—— भवन एक पुनि दीख सुहावा—- क्योंकि इसमें हनुमान जी ने प़वेश नहीं किया। कहने का तात्पर्य यह है कि सुंदर कांड में बहुत ही गंभीर भाव भरे हुए हैं । प़त्येक शब्द सुंदरता के विशिष्ट भाव से समाहित है यथा– सावधान मन करि पुनि शंकर , लागे कहन कथा अति सुन्दर ।
संपुट पाठ एक विशेष महत्व रखता है । अतः यदि सुंदर कांड पाठ संपुट रख कर किया जाय तो फलानुभूति सद्य: प़गट हो जाता है। पाठ में जल्दबाजी न करें । नित्य एक पाठ करने में दो घंटे से कुछ अधिक समक्ष लगता है अतः यदि समय का अभाव है तो दो दिन में (३०दोहे एकदिन) पाठ पूरा किया जा सकता है परंतु आवाहन पूजन तो शुरुआत में हर दिन करना अनिवार्य है।
Related posts
Subscribe for newsletter
* You will receive the latest news and updates on your favorite celebrities!
Varshik Rashifal 2025: सफलता और शांति के लिए जानें खास उपाय
Varshik Rashifal 2025 ज्योतिष शास्त्र के आधार पर आने वाले वर्ष के लिए सभी राशियों का विश्लेषण करता है। हर…
सरकारी नौकरी का ग्रहों से संबंध तथा पाने का उपाय
सरकारी नौकरी पाने की कोशिश हर कोई करता है, हलांकि सरकारी नौकरी किसी किसी के नसीब में होती है। अगर…
जानिए कैसे ग्रह आपकी समस्याओं से जुड़े हैं
जीवन में छोटी-मोटी परेशानियां हों तो यह सामान्य बात है, लेकिन लगातार परेशानियां बनी रहें या छोटी-छोटी समस्याएं भी बड़ा…
Vish yog का जीवन पर प्रभावVish yog का जीवन पर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में Vish yog और दोष व्यक्ति के जीवन पर सीधा प्रभाव डालते हैं, यदि किसी…
Gita Jayanti 2025 Date : महत्व, पूजा विधि और गीता जयंती मनाने के तरीके
Jayanti 2025 हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि…
Bhai Dooj Vastu Tips 2025 : भाई-बहन के रिश्ते में शांति के उपाय
भाई दूज, भाई-बहन के प्रेम और सम्मान का त्योहार है। यह केवल एक सांस्कृतिक परंपरा नहीं बल्कि भाई-बहन के रिश्ते…
Dhanteras ke Upay 2025 : धन, सौभाग्य और समृद्धि पाने के आसान उपाय
धनतेरस हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ त्योहार है, जो दीपावली के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक होता है। यह…
Diwali Vastu Tips 2025 : घर में लक्ष्मी प्रवेश के लिए वास्तु उपाय
दीपावली, जिसे रोशनी का त्योहार कहा जाता है, केवल घर को सजाने और दीपक जलाने का पर्व नहीं है। यह…