कुंडली में स्वास्थ्य योग | बीमारियों और रोगों की पहचान

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कुंडली में स्वास्थ्य योग | बीमारियों और रोगों की पहचान

By admin

May 14, 2026

ज्योतिष शास्त्र में मानव जीवन के हर पहलू का विश्लेषण कुंडली के माध्यम से किया जाता है। जैसे धन, विवाह और करियर महत्वपूर्ण हैं, वैसे ही स्वास्थ्य भी जीवन का सबसे अहम आधार है। कुंडली में बनने वाले स्वास्थ्य योग यह संकेत देते हैं कि व्यक्ति को जीवन में किन बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है, स्वास्थ्य मजबूत रहेगा या कमजोर, और किन ग्रहों की स्थिति स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कुंडली में स्वास्थ्य योग कैसे बनता है और बीमारियों की पहचान कैसे की जाती है।

कुंडली में स्वास्थ्य कैसे देखें ?

कुंडली में स्वास्थ्य का आकलन एक ही भाव या ग्रह से नहीं किया जाता, बल्कि कई भावों और ग्रहों का संयुक्त अध्ययन किया जाता है। मुख्य रूप से निम्न भाव स्वास्थ्य से जुड़े माने जाते हैं:

1. प्रथम भाव (लग्न भाव)

2. छठा भाव

3. आठवाँ भाव

4. बारहवाँ भाव

👉 इन चारों भावों का अध्ययन करके कुंडली में स्वास्थ्य योग की सही पहचान की जाती है।

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कुंडली में स्वास्थ्य का संबंध किस ग्रह से है?

हर ग्रह शरीर के किसी न किसी अंग और स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ा होता है। नीचे प्रमुख ग्रहों का स्वास्थ्य से संबंध बताया गया है:

☀ सूर्य

🌙 चंद्रमा

♂ मंगल

☿ बुध

♃ गुरु

♀ शुक्र

♄ शनि

☊ राहु–केतु

इन ग्रहों की स्थिति से कुंडली में स्वास्थ्य योग मजबूत या कमजोर बनता है।

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कुंडली में बीमारियों और रोगों की पहचान

कुंडली में बीमारियों की पहचान कुछ खास योगों और स्थितियों से की जाती है:

1. पाप ग्रहों का लग्न पर प्रभाव

यदि लग्न या लग्नेश पाप ग्रहों से ग्रसित हो, तो व्यक्ति कमजोर स्वास्थ्य वाला होता है।

2. छठे भाव का अशुभ होना

3. आठवें भाव में पाप ग्रह

4. चंद्रमा पर पाप ग्रहों की दृष्टि

5. स्वास्थ्य योग का अभाव

यदि शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध) कमजोर हों, तो शरीर रोगों से जल्दी प्रभावित होता है।

👉 इन सभी संकेतों से कुंडली में स्वास्थ्य योग और रोगों की पहचान की जाती है।

मजबूत स्वास्थ्य योग के संकेत

ऐसी कुंडली में व्यक्ति दीर्घायु और स्वस्थ रहता है।

निष्कर्ष

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में स्वास्थ्य योग व्यक्ति के संपूर्ण जीवन को प्रभावित करता है। समय रहते कुंडली में स्वास्थ्य से जुड़े योगों की पहचान कर ली जाए, तो रोगों से बचाव और सही उपचार संभव है। ग्रहों की दशा-महादशा भी स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है, इसलिए समय-समय पर कुंडली का विश्लेषण आवश्यक है।

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