Nirjala ekadashi 2025: सबसे कठिन लेकिन पुण्यदायक व्रत

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Nirjala ekadashi 2025: सबसे कठिन लेकिन पुण्यदायक व्रत

By admin

April 24, 2025

Nirjala ekadashi 2025 निर्जला एकादशी हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह व्रत 6 जून 2025, को रखा जाएगा। यह एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इसमें बिना जल के उपवास करने का नियम होता है, इसलिए इसे ‘निर्जला’ कहा जाता है। इस व्रत को करने से सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है, और इसे करने वाला व्यक्ति मोक्ष की प्राप्ति करता है।

निर्जला एकादशी व्रत नियम (Nirjala Ekadashi Vrat Niyam)

Nirjala ekadashi 2025 का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें जल तक ग्रहण नहीं किया जाता। यह व्रत सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक रखा जाता है। आइए जानते हैं इसके मुख्य नियम:

  1. व्रत की पूर्व संध्या को सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  2. एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  3. पूरे दिन न अन्न, न जल – कुछ भी ग्रहण न करें।
  4. दिनभर भजन-कीर्तन करें और व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।
  5. रात्रि में जागरण करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
  6. द्वादशी के दिन ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।

निर्जला एकादशी व्रत कथा (Nirjala Ekadashi 2025 Vrat Katha)

पुराणों के अनुसार, यह व्रत भीमसेन से जुड़ा हुआ है। भीम को भोजन के बिना रहना असहनीय था, इसलिए वे एकादशी व्रत नहीं कर पाते थे। जब उन्होंने इस बात को महर्षि व्यास से बताया, तो उन्होंने एक ही व्रत रखने की सलाह दी – वह था निर्जला एकादशी।

इस एकादशी में सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। भीम ने यह कठिन व्रत रखा और पूरे दिन बिना अन्न-जल के रहे। उन्होंने पूरी श्रद्धा से व्रत किया और भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन देकर मोक्ष प्रदान किया। तभी से यह व्रत अत्यधिक पुण्यदायक माना जाता है।

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निर्जला एकादशी के लाभ (Benefits of Nirjala Ekadashi 2025)

Nirjala ekadashi 2025 का व्रत रखने से व्यक्ति को अनेक आध्यात्मिक और स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं:

निर्जला एकादशी पर क्या करें और क्या करें (Kya Kare Kya Na Kare)

क्या करें:

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क्या करें:

निष्कर्ष: निर्जला एकादशी का व्रत आत्मशुद्धि, संयम और श्रद्धा का प्रतीक है। यह व्रत कठिन जरूर है, लेकिन इसका पुण्य अत्यंत महान होता है। जो व्यक्ति इसे पूरी निष्ठा से करता है, उसे सांसारिक बंधनों से मुक्ति और परमात्मा की कृपा प्राप्त होती है।

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