भारतवर्ष में सावन के महीने का विशेष महत्त्व होता है और इसी माह में मनाया जाने वाला पर्व Hariyali Teej 2025 महिलाओं के लिए अत्यंत पावन और हर्षोल्लास से भरा होता है। यह पर्व विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और सौभाग्य की कामना के लिए मनाया जाता है। इस ब्लॉग में हम आपको हरियाली तीज 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पूजन सामग्री और इस पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की पूरी जानकारी देंगे।
हरियाली तीज 2025 तिथि एवं मुहूर्त (Hariyali Teej Date and Shubh Muhurat)
Hariyali Teej हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व खासकर उत्तर भारत के राज्यों जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और दिल्ली में धूमधाम से मनाया जाता है।
हरियाली तीज 2025 की तिथि: मंगलवार, 29 जुलाई 2025
तीज तृतीया तिथि प्रारंभ: 26 जुलाई 2025 को शाम 5:12 बजे से
तीज तृतीया तिथि समाप्त: 27 जुलाई 2025 को शाम 7:45 बजे तक
पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रातः 06:00 बजे से 08:30 बजे तक (स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में बदलाव संभव है)
इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं, झूला झूलती हैं और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
हरियाली तीज व्रत की पूजा विधि (Hariyali Teej Pujan Vidhi)
Hariyali Teej की पूजा विधि विशेष रूप से पारंपरिक और शुभ मानी जाती है। इस दिन व्रत रखकर संपूर्ण दिन निर्जला उपवास किया जाता है और रात्रि में कथा सुनकर व्रत का पारण किया जाता है। पूजा विधि निम्नलिखित है:
- प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लें।
- लकड़ी या मिट्टी की चौकी पर लाल या पीले कपड़े बिछाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
- फल, फूल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप, मिठाई आदि से पूजा करें।
- हरियाली तीज व्रत कथा का श्रवण करें।
- विवाहित महिलाएं 16 श्रृंगार करके माता पार्वती को सुहाग की सामग्रियाँ अर्पण करती हैं।
- पूजा के बाद झूला झूलना और गीत गाना इस दिन की विशेष परंपरा है।
- रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें (कुछ परंपराओं में अगले दिन पारण किया जाता है)।
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हरियाली तीज पूजन सामग्री (Hariyali Teej Pujan Samagri)
पूजन के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:
- गंगाजल
- रोली और चंदन
- हल्दी और कुमकुम
- अक्षत (चावल)
- फूल (विशेष रूप से हरियाली से जुड़े फूल)
- धूप और दीपक
- मिठाई (घेवर विशेष रूप से)
- फल
- नारियल
- 16 श्रृंगार की सामग्री (लाली, बिंदी, चूड़ियाँ, मेहंदी, इत्र आदि)
- सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिछिया आदि)
- पूजा की चौकी और साफ कपड़ा
- शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र
- कथा पुस्तक या कथा सुनाने वाली महिला
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हरियाली तीज का महत्व (Hariyali Tej Importance)
हरियाली तीज का धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है:
- धार्मिक महत्त्व: यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। माता पार्वती ने कई वर्षों तक कठोर तपस्या कर शिवजी को पति रूप में प्राप्त किया था। इसी दिन शिवजी ने पार्वती को स्वीकार किया।
- सौभाग्य की प्राप्ति: विवाहित महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करती हैं। अविवाहित लड़कियाँ अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना करती हैं।
- प्रकृति और हरियाली से जुड़ाव: यह पर्व वर्षा ऋतु और हरियाली के स्वागत का भी प्रतीक है। महिलाएं हरे वस्त्र पहनती हैं, पेड़ों पर झूले झूलती हैं और लोकगीत गाती हैं।
- सांस्कृतिक महत्त्व: यह पर्व नारी सशक्तिकरण, लोककला और पारंपरिक गीत-संगीत का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में मेले लगते हैं और महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा करती हैं।
- मानसिक और सामाजिक सुख: हरियाली तीज महिलाओं को सामाजिक रूप से जोड़ने वाला पर्व है जहाँ वे सजी-धजी होकर मेल-मिलाप करती हैं, जिससे आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं।
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